बिजली कटौती पर सख्त यूपी CM: 24 घंटे सप्लाई का आदेश, 2 अफसर निलंबित

बिजली कटौती पर सख्त यूपी CM: 24 घंटे सप्लाई का आदेश, 2 अफसर निलंबित
25 मई 2026 0 टिप्पणि Kaushal Badgujar

उत्तर प्रदेश में चल रही भयंकर गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया था, और तभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बिजली विभाग की लापरवाही पर गुस्सा दिखाते हुए सख्त कार्रवाई का ऐलान किया। 23 मई 2026 को जारी किए गए इस निर्णय के तहत शहरों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का कड़ा आदेश दिया गया है। इस सख्त रवैये के बीच, जवाबदेही के तहत दो वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत निलंबित (suspend) कर दिया गया है।

यह कोई मामूली निर्देश नहीं था। जब तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका था और बार-बार हो रही लोड शेडिंग से जनजीवन प्रभावित हो रहा था, तो राज्यपाल भवन में हुई बैठक में माहौल गंभीर था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गर्मियों में बिजली की कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस निर्णय का सीधा असर अब पूरे उत्तर प्रदेश में महसूस होने वाला है, खासकर उन इलाकों में जहां पिछले दिनों बिजली की कमी से सबसे ज्यादा शिकायतें आई थीं।

गर्मी और बिजली संकट: पृष्ठभूमि

मई 2026 का यह तीसरा सप्ताह उत्तर प्रदेश के लिए काफी कठिन रहा। लगातार बढ़ते तापमान ने एसी और पंखों की मांग में भारी वृद्धि की है, जिससे बिजली की डिमांड में अचानक उछाल आया। हालांकि, यूपीपीसीएल (Uttar Pradesh Power Corporation Limited) की तैयारी इस अचानक बढ़े बोझ को संभालने में नाकाम साबित हुई। कई शहरों में दिन के उजाले में ही अंधेरा छा जाता था, जो आम आदमी के लिए एक बड़ी परेशानी बन गया था।

इसी पृष्ठभूमि में, जब समाचार माध्यमों ने इस 'बिजली संकट' (Electricity Crisis) की रिपोर्टिंग शुरू की, तो मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत हस्तक्षेप किया। यह पहली बार नहीं है जब राज्य सरकार बिजली आपूर्ति में ढील पर नाराजगी जता रही है, लेकिन इस बार कार्रवाई का स्तर और भी सख्त था।

24 घंटे बिजली का आदेश और निगरानी व्यवस्था

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, यूपीपीसीएल ने औपचारिक रूप से एक नई नीति लागू की। इसके अनुसार, सभी शहरी क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति 24 घंटे निरंतर रखी जाएगी। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लक्ष्य 18 घंटे की नियमित बिजली आपूर्ति निर्धारित किया गया है। यह निर्णय विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहां पहले अक्सर अनियमित कटौती की शिकायतें होती थीं।

निर्देशों केवल कागज पर रहने नहीं दिए गए। निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को रात के समय फील्ड में तैनात किया गया। लखनऊ, जो राज्य की राजधानी है, में इसका एक विशेष उदाहरण देखा गया। यहां 22 अधीक्षण और अधीक्षण अभियंतों (Superintending and Executive Engineers) को रात 9 बजे से सुबह 1 बजे तक अलग-अलग इलाकों में तैनात किया गया। यह समय सीमा इसलिए चुनी गई क्योंकि रात के समय बिजली की कटौती की शिकायतें सबसे अधिक दर्ज होती हैं।

शिकायत निवारण में तेजी: 1912 हेल्पलाइन

शिकायत निवारण में तेजी: 1912 हेल्पलाइन

बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की शिकायतों को सुलझाने के लिए अपनी 1912 हेल्पलाइन को प्राथमिकता दी है। पहले से मौजूद इस हेल्पलाइन पर आने वाली हर शिकायत को अब 'प्राथमिकता आधारित' (priority basis) तरीके से निपटाया जाएगा। इसका मतलब है कि यदि किसी क्षेत्र में बिजली चली जाती है, तो संबंधित टीम को तुरंत बुलाया जाएगा और समस्या के समाधान पर नजर रखी जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के लिए एक राहत की खबर है, बशर्ते कि इसे जमीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू किया जाए। पिछले वर्षों में हेल्पलाइन की प्रतिक्रिया धीमी रहने की शिकायतें सामने आई थीं, इसलिए यह नया निर्देश एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है।

अनुशासनिक कार्रवाई: दो अफसरों का निलंबन

इस सख्त रवैये का सबसे चौंकाने वाला पहलू दो अधिकारियों का निलंबन है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी और लापरवाही के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को सेवा से निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, अभी तक इन अधिकारियों के नाम या उनके विशिष्ट पदों का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए एक चेतावनी के रूप में काम कर रही है।

यूट्यूब और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो शीर्षकों जैसे "UP Electricity Crisis | CM Yogi" और "CM योगी ने 24 घंटे बिजली सप्लाई के दिए सख्त आदेश" से स्पष्ट होता है कि यह निर्णय सार्वजनिक रूप से एक कड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि बिजली आपूर्ति में कोई भी छूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आगे क्या होगा?

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि ये निर्देश कितनी दूर तक प्रभावी होते हैं। गर्मी का मौसम अभी बाकी है, और अगले कुछ सप्ताह इस नीति की असली परख होंगे। यदि शहरों में 24 घंटे बिजली और गांवों में 18 घंटे की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है, तो यह उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं, यदि कटौती जारी रही, तो अधिकारियों पर और भी सख्त कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है।

Frequently Asked Questions

क्या अब शहरों में पूरी तरह से बिजली कटौती बंद हो जाएगी?

हाँ, मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, ट्रांसफार्मर फेल होने या तकनीकी खराबी जैसे अप्रत्याशित कारणों से छोटी अवधि के लिए कटौती हो सकती है, लेकिन नियोजित लोड शेडिंग को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की स्थिति क्या रहेगी?

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यूपीपीसीएल द्वारा कम से कम 18 घंटे की नियमित बिजली आपूर्ति का आदेश दिया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अभियंतों की निगरानी में सुधार किया गया है ताकि गांवों में भी बिजली की कमी न हो।

किस प्रकार की शिकायतों के लिए 1912 हेल्पलाइन का उपयोग करें?

यदि आपके घर या व्यापार में बिजली नहीं आ रही है, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव हो रहा है, या बिजली के बिल से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप 1912 हेल्पलाइन पर कॉम कर सकते हैं। अब इन शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत निपटाने का निर्देश दिया गया है।

निलंबित किए गए अधिकारियों के खिलाफ क्यों कार्रवाई की गई?

बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी और लापरवाही के लिए दो अधिकारियों को निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब राज्य में भयंकर गर्मी थी और बिजली कटौती से जनता परेशान थी। यह अन्य अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने कर्तव्यों का पूर्ण निर्वहन करें।

लखनऊ में रात के समय अधिकारियों की तैनाती क्यों की गई?

लखनऊ में रात 9 बजे से सुबह 1 बजे तक 22 वरिष्ठ अभियंतों को तैनात किया गया क्योंकि इस समय बिजली की कटौती की शिकायतें सबसे अधिक दर्ज होती हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि रात के समय भी बिजली आपूर्ति में कोई बाधा न आए।