सीकर हत्याकांड: लॉरेंस बिष्णोई को बड़ी राहत, अदालत ने किया बरी
राजस्थान के सीकर जिले में पूर्व सरपंच सरदार राव की हत्या के मामले में गैंगस्टर लॉरेंस बिष्णोई को एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। करीब नौ साल बाद, विशेष न्यायालय ने मंगलवार, 22 जनवरी को अपना फैसला सुनाते हुए बिष्णोई और सह-आरोपी यतेंद्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह घटना सीकर, राजस्थान में हुई थी, जहां राजनीतिक रंजिश के कारण इस हत्याकांड को चर्चित मुकदमे के रूप में देखा जाता रहा है।
यह मामला अब नौ वर्ष पुराना हो चुका है, लेकिन आज भी इसमें सवाल उठ रहे हैं। अदालत ने 13 जनवरी को सभी आरोपियों को दोषी ठहराया था, और 22 जनवरी को सजा का ऐलान हुआ। सुनवाई के दौरान, लॉरेंस बिष्णोई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे, जबकि अन्य अभियुक्तों को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया। न्यायाधीश रेणुका हुड्डा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने यह निर्णय सुनाया।
अदालती फैसले का विस्तृत विवरण
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि लॉरेंस बिष्णोई पर आरोप था कि उसने शूटरों को भेजकर सरदार राव की हत्या करवाई थी। हालांकि, साक्ष्यों की कमी या अन्य कानूनी कारणों से अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। वहीं, सह-आरोपी यतेंद्र को भी बरी कर दिया गया।
इसके विपरीत, अन्य आरोपियों को सख्त सजा सुनाई गई:
- आजीवन कारावास: हरदेवराम, अरुण और हरविंदर नामक तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई।
- 10 वर्ष की सजा: सुनील, मुकेश, भानुप्रताप सहित कुल छह आरोपियों को 10-10 वर्ष की सजा सुनाई गई।
मामले में कुल सात आरोपी थे, जिनमें से एक अभी भी फरार बताया जा रहा है। यह तथ्य इस बात की ओर इशारा करता है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाया है।
लॉरेंस बिष्णोई: जेल से चल रही साम्राज्य
लॉरेंस बिष्णोई, जो वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं, पिछले कई वर्षों से विवादों में रहे हैं। वे 2015 से जेल में हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, वे जेल के अंदर से भी अपने अपराधिक गतिविधियों को संचालित करते रहते हैं। उनकी पहचान एक ऐसे गैंगस्टर की है जिसका प्रभाव पंजाब से लेकर देश भर तक फैला हुआ है।
उनकी शुरुआत पंजाब के फाजिल्का जिले के दुतारवाली गांव से हुई थी। उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रियता दिखाई और बाद में गोल्डी बराड़ जैसे खूंखार गैंगस्टर से जुड़ गए। आज उनके गिरोह में 700 से अधिक शूटर होने का अनुमान है, जिनमें से लगभग 300 सिर्फ पंजाब से हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई
बिष्णोई गैंग की गतिविधियां अब केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। 29 सितंबर 2025 को, कनाडा सरकार ने भारत की मांग पर "बिष्णोई गैंग" को अपने कानून के तहत एक "आतंकवादी संगठन" घोषित किया। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नाथली ड्रोइन के बीच दिल्ली में हुई बैठक के बाद उठाया गया।
इस घोषणा का मतलब है कि कनाडा में मौजूद गैंग सदस्यों को भारत में экстраडिट (प्रत्यर्पित) करने की प्रक्रिया तेज होगी, और उनकी संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। इससे पहले, 2018 में बिष्णोई पर बॉलीवुड स्टार सलमान खान की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा था, और 29 मई 2022 को पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी उनके गिरोह का नाम जुड़ा था।
आगे क्या होगा?
लॉरेंस बिष्णोई की इस बरी होने से पीड़ित पक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में असंतोष व्यक्त किया जा रहा है। क्या यह फैसला ऊपर से दबाव का परिणाम है? इस सवाल का जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं है।另一方面, कनाडा में हुई कार्रवाई यह संकेत देती है कि सरकार गैंगस्टर के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को तोड़ने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रही है। आने वाले दिनों में, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या फरार आरोपी को गिरफ्तार किया जाता है और क्या बिष्णोई के खिलाफ अन्य मामलों में नई कार्रवाई होती है।
Frequently Asked Questions
लॉरेंस बिष्णोई को इस मामले में क्यों बरी किया गया?
अदालत ने साक्ष्यों की कमी या कानूनी तकनीकी कारणों से लॉरेंस बिष्णोई और यतेंद्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, अन्य सह-आरोपियों को सजा सुनाई गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अदालत ने सबूतों के आधार पर निर्णय लिया।
इस मामले में अन्य आरोपियों को क्या सजा हुई?
हरदेवराम, अरुण और हरविंदर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। वहीं, सुनील, मुकेश, भानुप्रताप सहित छह अन्य आरोपियों को 10-10 वर्ष की सजा दी गई। एक आरोपी अभी भी फरार है।
कनाडा सरकार ने बिष्णोई गैंग के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
29 सितंबर 2025 को कनाडा सरकार ने बिष्णोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित किया। इससे कनाडा में उनके सदस्यों को भारत में प्रत्यर्पित करना और उनकी संपत्ति जब्त करना आसान हो जाएगा।
लॉरेंस बिष्णोई किस जेल में बंद हैं?
लॉरेंस बिष्णोई वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। वे 2015 से जेल में हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार वे जेल के अंदर से भी अपने गिरोह को नियंत्रित करते हैं।
सरदार राव की हत्या का मामला कब का है?
सरदार राव की हत्या करीब नौ साल पहले हुई थी। यह मामला राजस्थान के सीकर जिले में राजनीतिक रंजिश के कारण दर्ज किया गया था और अब तक चर्चित मुकदमा बना हुआ है।