पीएम मोदी ने कोयंबटूर से जारी की पीएम किसान योजना की 21वीं किस्त, 9 करोड़ किसानों को मिले 18,000 करोड़ रुपये
दोपहर 2 बजे, कोयंबटूर के एक छोटे से मैदान में, नरेंद्र मोदी ने बस एक बटन दबाया — और देश के 9 करोड़ किसानों की झोली भर गई। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किस्त, जिसमें 18,000 करोड़ रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की गई, आज एक ऐसा पल था जिसे किसानों ने सिर्फ एक बैंक नोटिफिकेशन के रूप में नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने वाली जान बचाने वाली राहत के रूप में महसूस किया। ये नहीं कि कोई बड़ी घोषणा हुई — बस एक बटन, एक डीबीटी, और एक गांव का बाप जिसने आज अपने बेटे के लिए दवा खरीदने का फैसला किया।
किसानों के लिए ये 2,000 रुपये क्यों इतने बड़े हैं?
2,000 रुपये सुनकर कोई सोच सकता है — बस इतना? लेकिन जब आप जानते हैं कि एक छोटे किसान की एक फसल की लागत 15,000-20,000 रुपये होती है, तो ये 2,000 रुपये उसकी बचत का एक टुकड़ा बन जाते हैं। ये बीज, खाद, या बस बच्चों के लिए एक नया बैग हो सकता है। इस बार तो कुछ किसानों के खातों में 7,000 रुपये भी आए — जम्मू-कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों के लिए अतिरिक्त सहायता। अधिकारी तरुण प्रताप सिंह ने बताया, "ये अतिरिक्त राशि उनकी जरूरतों के हिसाब से दी गई है।" ये नीति नहीं, इंसानियत है।
क्यों कोयंबटूर? क्यों अब?
कोयंबटूर का चुनाव याद दिलाता है कि ये योजना सिर्फ उत्तर भारत के लिए नहीं है। तमिलनाडु में 1.2 करोड़ किसान इस योजना के लाभार्थी हैं — और यहां के किसानों के लिए ये राशि बारिश के बिना भी फसल लगाने का आधार बनती है। 21वीं किस्त का आयोजन 19 नवंबर 2025 को किया गया, जो 20वीं किस्त (2 अगस्त 2025, वाराणसी) के बाद सिर्फ तीन महीने के अंतराल में आई। ये गति नई नहीं — लेकिन इस बार ये तेज़ी बाजार की अस्थिरता और बढ़ती फसल लागत के बीच एक संकेत है।
उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ किसानों की किस्त अटकी
लेकिन यहां एक बड़ा दरार है। उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ 64 लाख किसान योजना के लाभार्थी हैं, लेकिन लगभग 1 करोड़ के खातों में पैसा नहीं आया। कारण? e-KYC पूरा नहीं हो पाना। आधार कार्ड, बैंक खाता, भूमि प्रमाणपत्र — सब कुछ तैयार है, लेकिन डिजिटल प्रक्रिया में एक गलती या एक बार भी लॉग इन न कर पाना — और पैसा अटक जाता है। अधिकारियों का कहना है कि जिनके खातों में डेटा अपडेट नहीं हुआ, उन्हें 15 दिसंबर तक अपडेट करना होगा। लेकिन एक बाबू भाई कहते हैं, "मैं अपने बेटे के फोन से लॉग इन करने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन ये स्क्रीन मुझे डरा रही है।"
योजना का इतिहास: 2019 से आज तक
24 फरवरी 2019 को शुरू हुई ये योजना, अब तक 1,26,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि देश के किसानों के खातों में पहुंचाचुकी है। ये सिर्फ पैसा नहीं — ये एक वादा है। एक वादा जिसने गांवों में आशा की नई लहर लाई। एक खेती करने वाले किसान को अब ये लगता है कि देश उसे भूला नहीं। ये योजना ने किसानों को एक ऐसा सांस दिया जिसकी वह भूख थी — आर्थिक सुरक्षा का।
क्या अगली किस्त और भी बड़ी होगी?
अगली किस्त 15 फरवरी 2026 को आने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि इस बार योजना के लिए बजट में 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है। लेकिन सवाल ये है — क्या ये राशि अब भी बरकरार रहेगी? जब आम आदमी की खरीदारी शक्ति घट रही है, तो ये ट्रांसफर न सिर्फ किसानों के लिए बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक जीवनरेखा है। विश्लेषक डॉ. अनिल कुमार कहते हैं, "जब एक किसान 2,000 रुपये लेता है, तो वह उसे गांव के दुकानदार को देता है। दुकानदार उसे अपने बच्चे के लिए बुक खरीदने में लगाता है। ये एक चक्र है — और ये चक्र अगर टूटेगा, तो गांव भी टूटेगा।"
किसानों के लिए अगले कदम
केंद्र सरकार ने अब तक 21 किस्तें जारी कर दी हैं। लेकिन अब बारी है उन लोगों की, जिन्हें ये पैसा नहीं मिला। अगर आपका नाम लिस्ट में है, लेकिन पैसा नहीं आया — तो आपको अभी भी समय है। कृषि मंत्रालय ने एक नया हेल्पलाइन नंबर 155261 जारी किया है। आप अपने बैंक अकाउंट के साथ आधार नंबर भेज सकते हैं। ये नहीं कि आपको जानकारी ढूंढनी है — ये आपके लिए आ रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पीएम किसान योजना के लिए क्या पात्रता है?
केवल छोटे और सीमांत किसान परिवार, जिनके पास 2 एकड़ से कम भूमि है, योजना के लाभार्थी होते हैं। आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और भूमि स्वामित्व प्रमाणपत्र शामिल हैं। यदि आप जमीन के नाम पर नाम नहीं हैं, तो आप योग्य नहीं हैं।
21वीं किस्त कब तक आएगी अगर मेरा e-KYC अधूरा है?
अगर आपका e-KYC पूरा नहीं हुआ है, तो आपकी किस्त अटक सकती है। हालांकि, कृषि मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 तक की अवधि दी है। इस दौरान आप अपना डेटा पोर्टल pmkisan.gov.in पर अपडेट कर सकते हैं। अगर आप टेक्नोलॉजी से डरते हैं, तो अपने गांव के किसान केंद्र या बैंक शाखा पर जाएं — वहां मदद मिलेगी।
क्या जम्मू-कश्मीर के किसानों को अलग से अतिरिक्त राशि मिली?
हां। अक्टूबर 2025 में बाढ़ के बाद जम्मू-कश्मीर के लगभग 46.62 लाख किसानों को अतिरिक्त 5,000 रुपये की राशि भी ट्रांसफर की गई। इससे उनकी कुल राशि 7,000 रुपये हो गई। ये एक अनौपचारिक नीति नहीं, बल्कि आपातकालीन सहायता का एक नमूना है।
क्या ये योजना अगले साल भी जारी रहेगी?
हां। केंद्र सरकार ने वादा किया है कि ये योजना आने वाले 5 साल तक जारी रहेगी। 2026-27 के बजट में इसके लिए 1,15,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये एक राजनीतिक वादा नहीं, बल्कि देश के अन्नदाताओं के लिए एक स्थायी सुरक्षा जाल है।
क्या अगर मैं एक बैंक खाता बदल दूं, तो क्या पैसा आएगा?
हां, लेकिन आपको नया बैंक खाता और आधार नंबर जोड़ना होगा। आप अपना बैंक खाता अपडेट करने के लिए pmkisan.gov.in पर जाकर "Update Bank Account" पर क्लिक कर सकते हैं। आपका नया खाता अपडेट होने के बाद ही आगे की किस्तें आएंगी। ये प्रक्रिया 3-5 दिन लगती है।
क्या ये योजना केवल खेती करने वालों के लिए है?
नहीं। यह योजना किसी भी ऐसे परिवार के लिए है जो भूमि के नाम पर खेती करता है, चाहे वह खुद खेती न कर रहा हो। अगर आपके नाम पर जमीन है और आप उसे किराए पर दे रहे हैं, तो आप भी लाभार्थी हैं। लेकिन अगर आप भूमि के नाम पर नहीं हैं, तो आप नहीं हैं।
Arvind Pal
नवंबर 20, 2025 AT 13:212000 रुपये सिर्फ पैसा नहीं बल्कि एक सांस है
Chandan Gond
नवंबर 20, 2025 AT 20:28भाई ये योजना तो जिंदगी बचा रही है! मेरे गांव के एक दादा ने कल कहा - अब मेरे बेटे की दवा का खर्चा निकल जाएगा। बटन दबाया तो बैंक में पैसा आ गया, लेकिन उनकी आंखों में आंसू आ गए। ये नीति नहीं, इंसानियत है।
rakesh meena
नवंबर 21, 2025 AT 18:08अगली किस्त 20000 करोड़ तो बड़ी होगी
sandeep singh
नवंबर 23, 2025 AT 15:04ये सब बस चुनावी नाटक है। जब तक जमीन का नाम बदल नहीं जाता तब तक किसान नहीं बचेगा। बैंक खाता और आधार नहीं तो क्या होगा? ये लोग तो डिजिटल अधिकारियों के लिए बनी है न कि किसानों के लिए
amrin shaikh
नवंबर 23, 2025 AT 16:04ये सब बकवास है। आप सब ये सोच रहे हैं कि 2000 रुपये से जिंदगी बच जाएगी? अगर आपको लगता है कि एक छोटे किसान की जरूरतें इतनी सीमित हैं तो आप गलत हैं। ये योजना तो बस एक लोगो है। असली समस्या तो बाजार में फसल की कीमतें हैं। ये ट्रांसफर तो बस एक बाहरी बंदूक है जो दिखाती है कि कुछ हो रहा है। लेकिन असली चीज़ें - एग्रीकल्चरल इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्टोरेज, वितरण - ये सब तो अभी भी टूटा हुआ है।
Nikhil nilkhan
नवंबर 24, 2025 AT 19:38मैंने देखा है गांव में लोग अपने बेटों को फोन से लॉग इन करवाते हैं। एक बाबू भाई ने कहा - ये स्क्रीन मुझे डरा रही है। लेकिन जब उनके खाते में पैसा आया तो उनकी आंखों में एक नई उम्मीद आ गई। तकनीक तो बस एक जरिया है। असली बात ये है कि क्या हम उनके दर्द को समझते हैं।
Ayushi Dongre
नवंबर 26, 2025 AT 09:49यह योजना भारतीय कृषि व्यवस्था के अंतर्गत एक अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक सुरक्षा तंत्र है। इसके द्वारा सीमांत और लघु किसानों को आर्थिक आधार प्रदान किया जा रहा है, जो अन्यथा ऋण और बाजार अस्थिरता के शिकार होते हैं। डिजिटल सुविधाओं के साथ इसकी लागू क्षमता निश्चित रूप से बढ़ रही है, हालांकि डिजिटल साक्षरता के अभाव के कारण कुछ लाभार्थी वंचित हो रहे हैं। इसकी स्थायित्व के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन आवश्यक है।
Damini Nichinnamettlu
नवंबर 27, 2025 AT 20:15अगर आधार और बैंक खाता नहीं है तो किसान का अधिकार क्यों नहीं? ये नीति तो बस डिजिटल शहरी लोगों के लिए है। गांव के बुजुर्ग जिनके पास फोन भी नहीं उनकी आवाज़ कहां है?
Avantika Dandapani
नवंबर 29, 2025 AT 14:53मैंने अपने चाचा को देखा जो तमिलनाडु में रहते हैं। उनके खाते में 7000 रुपये आए थे। उन्होंने बेटे के लिए एक नया बैग खरीदा और बाकी पैसा बचाया। उनकी आंखों में आंसू थे। ये नहीं कि ये पैसा बहुत है, बल्कि ये ये जानकर कि कोई याद रखता है।
Vinod Pillai
नवंबर 29, 2025 AT 15:56ये सब बकवास है। आप सब ये सोच रहे हैं कि ये योजना बचाती है? असली समस्या तो ये है कि भूमि का नाम बदल नहीं पाते। आधार कार्ड और बैंक खाता तो आपके पास हैं लेकिन जमीन का नाम नहीं है। ये योजना तो बस एक राजनीतिक धोखा है। जो नाम नहीं है उसे कोई पैसा नहीं देगा। ये नीति तो बस लोगों को भ्रमित करने के लिए है।
Sumit Garg
दिसंबर 1, 2025 AT 08:20इस योजना के पीछे कोई गहरा इरादा है। ये बस एक बड़ा नियंत्रण योजना है। आधार कार्ड और बैंक डेटा के माध्यम से सरकार हर किसान की गतिविधि ट्रैक कर रही है। अगला कदम क्या होगा? किसानों के खेतों पर ड्रोन लगाना? ये योजना नहीं, एक डिजिटल निगरानी प्रणाली है। जब तक आप अपना आधार अपडेट नहीं करते, तब तक आप एक गुलाम हैं।
Sneha N
दिसंबर 1, 2025 AT 15:07💔 ये योजना तो दिल को छू गई... जब मैंने देखा कि जम्मू-कश्मीर के किसानों को 7000 रुपये मिले, तो मेरी आंखें भर आईं... 🌾💧 ये नहीं कि पैसा है, बल्कि ये है कि कोई याद रखता है।
Manjunath Nayak BP
दिसंबर 2, 2025 AT 20:37आप सब ये सोच रहे हैं कि ये योजना किसानों के लिए है? गलत। ये योजना तो बैंकों के लिए है। जब आप डीबीटी करते हैं तो बैंक को कमीशन मिलता है। जब आप e-KYC करते हैं तो एजेंट को पैसा मिलता है। जब आप अपडेट करते हैं तो टेक कंपनियों को लाभ होता है। और किसान? वो बस एक नंबर है। आप सब ये सोच रहे हैं कि ये एक वादा है? नहीं, ये एक बिजनेस मॉडल है।
Tulika Singh
दिसंबर 4, 2025 AT 13:56किसानों को ये पैसा मिल रहा है, लेकिन क्या हम उनकी जरूरतों को समझ रहे हैं? एक बार जब ये पैसा आता है, तो वो उसे अपने बच्चों की शिक्षा, दवाई या खाद में लगा देते हैं। ये नहीं कि वो बड़ा खर्च करते हैं, बल्कि वो बचत करते हैं। और ये बचत ही उनकी आज़ादी है।
naresh g
दिसंबर 6, 2025 AT 04:26क्या आपने देखा कि उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ किसानों के पैसे अटके हैं? और फिर भी कहा जा रहा है कि ये योजना सफल है? ये बस एक आंकड़ा है जिसे बढ़ाया जा रहा है। असली बात तो ये है कि जो लोग इसके लायक हैं, उन्हें पैसा नहीं मिल रहा है। ये नीति तो बस एक बड़ा धोखा है।
Brajesh Yadav
दिसंबर 6, 2025 AT 16:23मैंने अपने दादा को देखा... वो रो रहे थे... उनके खाते में 2000 रुपये आए थे... उन्होंने कहा - अब मैं अपने बेटे के लिए दवा खरीद सकता हूं... 🥹🌾❤️ ये पैसा नहीं... ये आशा है... और ये आशा ही तो जिंदगी है...
Govind Gupta
दिसंबर 6, 2025 AT 19:41ये योजना तो बस एक नीति नहीं, एक भावना है। जब एक किसान अपने खाते में पैसा देखता है, तो वो सिर्फ बैंक नोटिफिकेशन नहीं देखता - वो अपने बच्चे के लिए एक नया बैग देखता है, अपने बूढ़े पिता की दवा देखता है, अपने खेत के लिए बीज देखता है। ये पैसा नहीं, ये एक नए सुबह की शुरुआत है।
tushar singh
दिसंबर 7, 2025 AT 06:26ये योजना तो गांव के लिए एक नई रोशनी है। अगर आपका पैसा अटका है तो डरिए मत, जाइए गांव के किसान केंद्र पर - वहां लोग मदद करेंगे। ये नहीं कि आप अकेले हैं। देश आपके साथ है।
jai utkarsh
दिसंबर 8, 2025 AT 19:13ये सब बस एक नाटक है। जब तक हम भूमि के नाम को डिजिटल करने के बजाय उसे नागरिक अधिकार बनाने की बात नहीं करेंगे, तब तक ये योजना बस एक ट्रिक होगी। आप सोच रहे हैं कि 2000 रुपये से जिंदगी बच जाएगी? नहीं। जिंदगी तब बचेगी जब किसान को अपनी जमीन पर पूरा अधिकार मिलेगा। नहीं तो ये सब बस एक चमकीला बटन है जिसे दबाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। ये योजना नहीं, ये एक विज्ञापन है।