राफेल-मिसाइलें बेकार हैं अगर AI सॉफ्टवेयर नहीं: लेफ्टनेंट जनरल राज शुक्ला
भारत के रक्षा क्षेत्र में अब सिर्फ लोहे और बारूद के दम पर जीत हासिल नहीं की जा सकती। लेफ्टनेंट जनरल राज शुक्ला (रिटायर्ड), जो आर्मी ट्रेनिंग कमांड के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग रहे हैं, ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। 17 मार्च, 2026 को ANI को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि राफेल जैसे फाइटर जेट और घातक मिसाइलें तब तक बेकार हैं, जब तक उनके पास उन्हें सटीक तरीके से चलाने वाला AI सॉफ्टवेयर न हो। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत ने अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारी निवेश नहीं किया, तो भविष्य के युद्धों में हम पिछड़ जाएंगे।
दरअसल, यह बात उन्होंने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026नई दिल्ली के दौरान कही। जनरल शुक्ला का मानना है कि हम 'एल्गोरिदम युद्ध' (Algorithmic Warfare) के दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहाँ हार्डवेयर से ज्यादा सॉफ्टवेयर की अहमियत है।
हार्डवेयर की चमक और सॉफ्टवेयर की हकीकत
अक्सर हम गर्व करते हैं कि हमारे पास दुनिया के सबसे बेहतरीन विमान और मिसाइलें हैं, लेकिन जनरल शुक्ला ने इस सोच को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि युद्ध के मैदान में कोई भी हथियार तब तक प्रभावी नहीं होता जब तक उसकी 'डिलीवरी' सटीक न हो।
उन्होंने समझाया कि आधुनिक युद्ध अब केवल ताकत का खेल नहीं, बल्कि डेटा और गणना का खेल बन गया है। उनके मुताबिक, राफेल और मिसाइलें महज औजार हैं; असली दिमाग वह सॉफ्टवेयर है जो तय करता है कि हमला कहाँ, कब और कैसे करना है। अगर सॉफ्टवेयर पुराना है या AI से लैस नहीं है, तो करोड़ों डॉलर के ये हथियार सिर्फ शोपीस बनकर रह जाएंगे।
मिलिट्री LLMs और डेटा इंजीनियरों की जरूरत
एक कड़वी सच्चाई यह भी सामने आई कि सेना के भीतर AI को समझने और लागू करने वाले नेतृत्व की कमी है। जनरल शुक्ला ने बेबाकी से कहा, "AI सिखाने के लिए कोई एडिशनल सेक्रेटरी या मेजर जनरल का होना बेकार है; उनके पास AI की वास्तविक समझ नहीं है।"
उन्होंने एक ठोस योजना का सुझाव दिया है: सेना को कम से कम 50 अनुभवी डेटा इंजीनियरों की एक टीम तैनात करनी चाहिए। यह टीम विशेष रूप से मिलिट्री के लिए 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स' (LLMs) विकसित करेगी। यहाँ एक पेंच यह है कि सेना का डेटा और युद्ध की रणनीतियाँ नागरिक क्षेत्र (Civil Sector) के साथ साझा नहीं की जा सकतीं। इसलिए, हमें अपने खुद के, सुरक्षित और गुप्त रक्षा-विशिष्ट AI मॉडल्स की जरूरत है।
मंत्री अश्विनी वैष्णव के मॉडल और सेना की मांग
भारत सरकार के अश्विनी वैष्णव द्वारा विकसित 12 AI मॉडल्स का जिक्र करते हुए जनरल शुक्ला ने कहा कि इनमें से कम से कम 3 या 4 मॉडल पूरी तरह से सेना को सौंप दिए जाने चाहिए। क्योंकि सैन्य डेटा बेहद संवेदनशील होता है, इसे सामान्य नागरिक स्ट्रीम में नहीं डाला जा सकता।
रूस-यूक्रेन और गाजा: AI युद्ध के जीते-जागते उदाहरण
आधुनिक युद्ध की तस्वीर बदलने के लिए जनरल शुक्ला ने कुछ डराने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष में लगभग 70-80 प्रतिशत हताहतों के लिए ड्रोन जिम्मेदार रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि AI के आने से FPV (फर्स्ट-पर्सन व्यू) ड्रोन्स की सटीकता, जो पहले केवल 30-50 प्रतिशत थी, अब बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने गाजा और मध्य पूर्व के संघर्षों को दुनिया का पहला "AI युद्ध" करार दिया, जहाँ टारगेट तय करने, खुफिया जानकारी जुटाने और 'किल चेन' को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए AI का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।
वैश्विक बाजार और भविष्य की चुनौतियाँ
यह सिर्फ भारत की बात नहीं है, पूरी दुनिया इस दौड़ में है। मिलिट्री AI का बाजार 2023 में 9.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, जिसके 2035 तक बढ़कर 35 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। यह दिखाता है कि दुनिया भर की सेनाएँ अब सॉफ्टवेयर पर दांव लगा रही हैं।
जनरल शुक्ला के अनुसार, AI अब इन चार क्षेत्रों में अनिवार्य हो गया है:
- स्वचालित हथियार प्रणालियाँ (Automatic Weapons Systems)
- साइबर सुरक्षा (Cyber Security)
- लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन (Logistics)
- निगरानी और जासूसी अभियान (Surveillance)
हालांकि, मशीन द्वारा जीवन और मृत्यु का फैसला लेने जैसे नैतिक सवाल (Ethical Challenges) खड़े होते हैं, लेकिन उनका मानना है कि रणनीतिक बढ़त (Strategic Advantage) हासिल करने के लिए इन जोखिमों को स्वीकार करना होगा। जो देश AI में निवेश नहीं करेंगे, वे भविष्य के युद्धों में अस्तित्व के संकट का सामना करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
लेफ्टनेंट जनरल राज शुक्ला के अनुसार राफेल और मिसाइलें 'बेकार' क्यों हैं?
उनका मतलब यह नहीं है कि हथियार खराब हैं, बल्कि यह है कि बिना उन्नत AI सॉफ्टवेयर के, ये हथियार अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर सकते। AI ही वह तकनीक है जो इन हथियारों की डिलीवरी, लक्ष्य निर्धारण और सटीकता को बढ़ाती है, जिसके बिना ये महंगे उपकरण अप्रभावी हो जाते हैं।
सैन्य AI के लिए डेटा इंजीनियरों की आवश्यकता क्यों है?
सैन्य डेटा अत्यंत गोपनीय होता है और इसे नागरिक AI मॉडल्स के साथ साझा नहीं किया जा सकता। इसलिए, सेना को अपने स्वयं के सुरक्षित 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स' (LLMs) बनाने के लिए विशेषज्ञ डेटा इंजीनियरों की आवश्यकता है जो युद्ध की रणनीतियों को सॉफ्टवेयर में बदल सकें।
रूस-यूक्रेन युद्ध ने AI की अहमियत को कैसे साबित किया?
इस युद्ध में देखा गया कि AI-संचालित ड्रोन हमलों की सटीकता 30-50% से बढ़कर 80% हो गई है। इसके अलावा, कुल हताहतों में 70-80% हिस्सा ड्रोन्स का रहा है, जो यह दर्शाता है कि अब युद्ध का केंद्र पारंपरिक तोपखाने से हटकर AI-ड्रिवन ऑटोनॉमस सिस्टम्स की ओर जा रहा है।
मिलिट्री AI मार्केट का भविष्य क्या है?
वैश्विक मिलिट्री AI मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। 2023 में यह 9.9 बिलियन डॉलर था और अनुमान है कि 2035 तक यह 35 बिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगा। यह वैश्विक स्तर पर हथियारों की दौड़ को सॉफ्टवेयर-आधारित युद्ध की ओर ले जा रहा है।
क्या AI के इस्तेमाल में कोई नैतिक खतरा है?
हाँ, सबसे बड़ा खतरा यह है कि मशीनें जीवन और मृत्यु का निर्णय ले सकती हैं। हालांकि, जनरल शुक्ला का तर्क है कि यदि प्रतिद्वंदी देश AI का उपयोग कर रहे हैं, तो भारत के लिए रणनीतिक बढ़त हासिल करने हेतु AI अपनाना अनिवार्य है, अन्यथा हम युद्ध में पिछड़ जाएंगे।
Ashish Gupta
अप्रैल 13, 2026 AT 19:25भाई, एकदम सही बात कही है! 🚀 अब जमाना डेटा का है, सिर्फ मशीनों से काम नहीं चलेगा। हमें अपने टेक एक्सपर्ट्स को सेना में लाना ही होगा वरना हम पिछड़ जाएंगे। जोश बढ़ाओ भारत! 🔥🇮🇳
Anirban Das
अप्रैल 14, 2026 AT 00:17सब ठीक है पर लागू कौन करेगा? 🙄
Rashi Jain
अप्रैल 14, 2026 AT 05:54एक एक्सपर्ट के तौर पर मैं यह कहना चाहती हूँ कि मिलिट्री LLMs का विचार बहुत ही व्यावहारिक है क्योंकि डिफेंस डेटा की संवेदनशीलता को देखते हुए हम पब्लिक क्लाउड या विदेशी मॉडल्स पर भरोसा नहीं कर सकते। असल में, जब हम डेटा संप्रभुता (data sovereignty) की बात करते हैं, तो इसका मतलब केवल डेटा स्टोर करना नहीं, बल्कि उसे प्रोसेस करने वाले एल्गोरिदम पर भी हमारा नियंत्रण होना चाहिए, तभी हम अपनी रणनीतिक बढ़त को सुरक्षित रख पाएंगे और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार हो सकेंगे। हमें सिर्फ इंजीनियर नहीं, बल्कि ऐसे डोमेन एक्सपर्ट्स की जरूरत है जो सैन्य रणनीतियों को कोड में बदल सकें, ताकि एआई वास्तव में एक हथियार की तरह काम करे न कि केवल एक सहायक उपकरण की तरह।
Suman Rida
अप्रैल 16, 2026 AT 00:51सही दिशा में सोच है। अगर हम अपने युवाओं को डिफेंस टेक की तरफ प्रेरित करें, तो यह बदलाव जल्दी आएगा।
Arumugam kumarasamy
अप्रैल 17, 2026 AT 20:24कितना आश्चर्यजनक है कि कुछ लोगों को अब समझ आ रहा है कि सॉफ्टवेयर की अहमियत क्या है। आम जनता तो बस राफेल के नाम पर खुश हो जाती है, जबकि असली युद्ध तो कोड की लाइनों में लड़ा जाता है। भारत को अब अपनी नौकरशाही की धीमी गति को छोड़कर तेजी से कदम उठाने होंगे, अन्यथा हम केवल दूसरे देशों के सॉफ्टवेयर का लाइसेंस खरीदने तक ही सीमित रह जाएंगे, जो हमारी संप्रभुता के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है।
Senthilkumar Vedagiri
अप्रैल 18, 2026 AT 06:38हहह.. AI सॉफ्टवेयर? ये सब तो बस हमें डराने का तरीका है। असली खेल तो उन गुप्त चिप्स का है जो विदेशी कंपनियां पहले ही हमारे सिस्टम में डाल चुकी हैं। आप सोच रहे हैं कि हम AI बनाएंगे, पर असल में हम उनके जाल में फंस रहे हैं। 🙄 सारा डेटा तो पहले ही बाहर जा रहा होगा, ये बस पर्दा है!
Priyank Prakash
अप्रैल 19, 2026 AT 13:06अरे भाई, ये तो बहुत बड़ा ड्रामा है! 😱 मतलब अब तक हम सिर्फ खिलौनों से खेल रहे थे? क्या मज़ाक है! अब अचानक याद आया कि दिमाग भी चाहिए होता है हथियार चलाने के लिए। गजब की बात है यार, सच में!
sachin sharma
अप्रैल 21, 2026 AT 04:30ड्रोन वाली बात सच में डराने वाली है। युद्ध का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। 😶
Mayank Rehani
अप्रैल 22, 2026 AT 07:51बिल्कुल सही, एज-कंप्यूटिंग और न्यूरल नेटवर्क्स का इंटीग्रेशन अब अनिवार्य है। अगर हम लेटेंसी कम नहीं कर पाए, तो रीयल-टाइम किलिंग चेन फेल हो जाएगी।
Raman Deep
अप्रैल 23, 2026 AT 23:48बिल्कुल सही बात है!! 🇮🇳 हमें बस थोड़े और टेक लोगों की जरूरत है सेना में। सब बढ़िया होगा! ✨😊
saravanan saran
अप्रैल 24, 2026 AT 14:42तकनीक चाहे कितनी भी बढ़ जाए, युद्ध के मैदान में मानवीय संवेदना और विवेक की अपनी एक जगह रहेगी। मशीनें गणना कर सकती हैं, लेकिन नैतिकता नहीं। फिर भी, समय के साथ चलना जरूरी है।
shrishti bharuka
अप्रैल 25, 2026 AT 22:38वाह, अब हमें पता चला कि हमारे महंगे राफेल सिर्फ 'शोपीस' हैं। बहुत ही शानदार योजना है, बस अब ये इंजीनियर मिल जाएं तो कमाल हो जाए।
Suraj Narayan
अप्रैल 26, 2026 AT 06:23हमें रुकना नहीं है! अगर दुनिया AI की तरफ बढ़ रही है, तो भारत को लीड करना होगा। यह समय डरने का नहीं, बल्कि आक्रामक होकर निवेश करने का है।
Anamika Goyal
अप्रैल 27, 2026 AT 06:09क्या आपको लगता है कि हम वाकई में अपनी खुद की सुरक्षित AI प्रणाली बना पाएंगे? क्योंकि सुरक्षा और गोपनीयता की चिंता तो हमेशा रहेगी ही।
Prathamesh Shrikhande
अप्रैल 28, 2026 AT 11:35उम्मीद है कि सरकार इस पर जल्द काम करेगी। 🤞
Dr. Sanjay Kumar
अप्रैल 30, 2026 AT 06:54भाई साहब, ये तो एकदम फिल्म जैसा सीन हो गया! अब रोबोट्स ही लड़ेंगे युद्ध? गजब का मोड़ है कहानी में!
Robin Godden
अप्रैल 30, 2026 AT 08:37यह अत्यंत सराहनीय विचार है। यदि हम तकनीक को सही ढंग से अपनाते हैं, तो राष्ट्र की सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी।
Pranav nair
अप्रैल 30, 2026 AT 09:1680% सटीकता... ये तो बहुत खतरनाक है। 😬