Sensex-Nifty में U-टर्न: शुरुआती गिरावट के बाद 4 जुलाई 2025 को बढ़त के साथ बंद

दिनभर का उतार-चढ़ाव और क्लोज: डर हटते ही खरीदारी लौटी
सुबह की कमजोरी, दोपहर में झटके और आखिर में रिकवरी—शुक्रवार को बाजार ने क्लासिक यू-टर्न दिखाया। BSE Sensex 193.42 अंक (0.23%) चढ़कर 83,432.89 पर और Nifty 55.7 अंक (0.22%) बढ़कर 25,461 पर बंद हुआ। 25,450 का अहम स्तर संभलना भरोसा बढ़ाने वाला संकेत रहा।
सेशन की टोन सतर्क रही। SEBI की ताजा नियामकीय कार्रवाई के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में तेज गिरावट आई, जिससे शुरुआती घंटे में उतार-चढ़ाव बढ़ा। इसके बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की लगातार खरीद ने बाजार को सहारा दिया और इंडिसेज इंट्रा-डे लो से ऊपर निकल गए।
मार्केट ब्रेड्थ ने तस्वीर साफ रखी—1,962 शेयर चढ़े, 1,612 गिरे और 102 बिना बदलाव रहे। यह बताता है कि दबाव चुनिंदा स्टॉक्स तक सीमित था और broader market ने गिरावट में भी मजबूती दिखाई। इंडिया VIX करीब नौ महीने के निचले स्तर 12.32 के आसपास रही, यानी डर कम और उतार-चढ़ाव सीमित। कम VIX ने शॉर्ट कवरिंग और चुनिंदा खरीद को आसान बनाया।
सेक्टर्स में हाइलाइट्स साफ दिखे। रियल्टी इंडेक्स लगभग 0.9% चढ़ा—डिमांड और इन्वेंट्री साइकल पर हाल की पॉजिटिव कमेंट्री का असर। फार्मा में 0.8% की मजबूती दिखी, जहां डिफेंसिव दांव ने रोल निभाया। FMCG और ऑटो में चुनिंदा खरीद दिखी, जबकि बैंकिंग में मिला-जुला रुख रहा, फिर भी निफ्टी बैंक 0.42% बढ़कर 57,031.90 पर बंद हुआ। बड़े शेयरों में बजाज फिनसर्व और खासकर बाजाज फाइनेंस ने बढ़त में योगदान दिया।
ग्लोबल संकेत सीमित थे—अमेरिकी बाजार स्वतंत्रता दिवस के कारण बंद रहे, इसलिए विदेशी संकेतों का शोर कम रहा। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख था, पर घरेलू मोर्चे पर नियामकीय खबरों और महीने की शुरुआत में पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग ने स्थानीय ट्रिगर्स बनाए रखे।
टेक्निकल तस्वीर में, Nifty ने 25,300–25,350 के सपोर्ट बैंड का सम्मान किया और 25,500 के पास सप्लाई दिखी। इस दायरे से ऊपर स्थिरता मिले तो 25,600–25,700 की टेस्टिंग संभव है, जबकि नीचे 25,250/25,150 पर अगला सपोर्ट माना जा रहा है। बैंक निफ्टी में 56,600–56,800 का सपोर्ट और 57,400–57,700 का रेजिस्टेंस नजदीकी दायरा बनाते हैं।
हफ्ते भर में भी यही पैटर्न दिखा—मिड-वीक कमजोरी के बाद आखिर में सम्हलाव। 30 जून से 4 जुलाई के बीच बाजार ने गिरावट पर खरीदारी की आदत दिखाई, जो बताती है कि डिप्स पर डोमेस्टिक फ्लो सक्रिय हैं। DIIs की सस्टेन्ड खरीद ने एफपीआई से जुड़ी चिंताओं और नियामकीय अनिश्चितताओं का असर काफी हद तक संतुलित किया।
- ब्रेड्थ: 1,962 स्टॉक्स बढ़त में, 1,612 गिरावट में, 102 अपरिवर्तित—पॉजिटिव एडवांस-डिकलाइन रेशियो।
- वोलैटिलिटी: India VIX ~12.32—नौ महीने के निचले स्तर के करीब, यानी भावनाएं स्थिर।
- सेक्टोरल मूव: रियल्टी +0.9%, फार्मा +0.8%; FMCG/ऑटो में चुनिंदा खरीद, बैंक निफ्टी +0.42%.
- लार्जकैप एक्शन: बाजाज फाइनेंस प्रमुख गेनर; कुछ शेयरों पर SEBI एक्शन के बाद दबाव कायम।
ब्रॉडर मार्केट फ्रेम में मिडकैप/स्मॉलकैप ने भी शुरुआत की कमजोरी से उबरने की कोशिश की, हालांकि स्टॉक-विशेष खबरों ने चाल अलग-अलग रखी। कैश मार्केट में टर्नओवर सामान्य रहा और लो वोलैटिलिटी ने ट्रेडर्स को सीमित रेंज में रणनीति अपनाने पर मजबूर किया।
चयन और जोखिम प्रबंधन आज की कुंजी थे। जिन निवेशकों ने गिरावट पर क्वालिटी में जोड़ किया, उन्हें दिन के अंत में फायदा दिखा। डिफेंसिव पॉकेट्स—FMCG, फार्मा—ने पोर्टफोलियो को बफर दिया, जबकि हाई बीटा शेयरों में चुनिंदा शॉर्ट कवर्स से उछाल आया।
आगे की रणनीति: किन संकेतों पर रहेगी नजर
निकट अवधि में फोकस तीन बातों पर रहेगा—(1) SEBI से जुड़ी आगे की स्पष्टता और उसके बाद आने वाला सेक्टर-विशेष असर, (2) घरेलू मैक्रो संकेत जैसे PMI, महंगाई और औद्योगिक उत्पादन के प्रिंट्स, (3) ग्लोबल संकेत—डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड्स और कच्चे तेल के दाम। इसके अलावा, तिमाही नतीजों का सीजन शुरू होने वाला है, जिससे अर्निंग्स गाइडेंस और कैपेक्स कमेंट्री पर बाजार की नजरें टिकेंगी।
ट्रेडिंग प्लेबुक सरल रहेगी—25,300 के ऊपर टिके रहने पर बुल्स को बढ़त, 25,500–25,600 के ऊपर क्लोज मिलते ही मोमेंटम में एक और लेग संभव। नीचे 25,250–25,150 का बफर टूटे तो प्रॉफिट-बुकिंग गहरी हो सकती है। बैंकिंग में 56,800–57,700 का दायरा ब्रेकआउट/ब्रेकडाउन का इशारा देगा।
पोर्टफोलियो एंगल से, बड़े और स्थिर कैशफ्लो वाली कंपनियों में गिरावट पर जोड़ने की थीम कायम है। रियल्टी में प्राइस-एक्शन मजबूत है, पर सेलेक्टिव रहें—डेब्ट और प्री-सेल्स डेटा देखें। फार्मा/हेल्थकेयर में एक्सपोर्ट मिक्स और अमेरिकी रेगुलेटरी ट्रैक-रेकॉर्ड पर फोकस रखें। ऑटो में मांग का ट्रेंड अच्छा है, लेकिन इनपुट कॉस्ट और इन्वेंट्री संकेत देखकर ही एंट्री लें।
कई निवेशक पूछते हैं—क्या लो VIX मतलब जोखिम खत्म? जवाब है, नहीं। लो VIX अक्सर रेंज-बाउंड मार्केट दिखाता है, पर किसी भी नई खबर पर मूव तेज हो सकता है। इसलिए पोजिशन साइजिंग संभालकर, स्टॉप-लॉस के साथ काम करना समझदारी है।
संक्षेप में, बाजार ने यह साफ किया कि क्रूड, करेंसी और रेगुलेशन जैसे सिरदर्द होते हुए भी, घरेलू फ्लो और कॉर्पोरेट अर्निंग्स की उम्मीदें मजबूत सपोर्ट दे रही हैं। जब तक इंडेक्स अहम सपोर्ट बचा रहा है और VIX नीचा है, गिरावट पर चुनिंदा खरीद की थीम काम करती रहेगी—पर बिना अति-उत्साह के, नंबरों और रिस्क पर बराबर ध्यान के साथ।