नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह को 93वें जन्मदिन पर किया यादगार सलाम

नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह को 93वें जन्मदिन पर किया यादगार सलाम
27 सितंबर 2025 19 टिप्पणि Kaushal Badgujar

मोदी द्वारा सामाजिक मंच पर श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितंबर 2025 को एक भावपूर्ण पोस्ट के माध्यम से मनमोहन सिंह को उनके 93वें जन्म दिवस पर याद किया। X (पहले ट्विटर) पर मोदी ने लिखा, "पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ। हम उनके सार्वजनिक जीवन के लम्बे वर्षों में भारत को दी गई उपलब्धियों को फिर से याद करते हैं।" यह संदेश राष्ट्रीय स्तर पर कई लोगों द्वारा सराहा गया, क्योंकि यह दिखाता है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी एक दूसरे के योगदान का सम्मान कर सकते हैं।

इस पोस्ट में मोदी ने सिंह जी के आर्थिक सुधारों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्रगति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव को उजागर किया। उन्होंने कहा कि सिंह जी के नेतृत्व में भारत ने 1991 की आर्थिक उछाल से लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी तक कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए।

डॉ. मनमोहन सिंह की विरासत की समीक्षा

डॉ. मनमोहन सिंह की विरासत की समीक्षा

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को गुरदेववाड़ा, पाकिस्तान (अब भारत) में हुआ था। वे एक महान अर्थशास्त्री, शैक्षिक विद्वान और राजनेता थे। 1991 में उनका आर्थिक उदारीकरण योजना भारत को बाहरी निवेश और बाजार खुलापन की ओर ले गई, जिससे लाखों रोजगार और वृद्धि हुई। उनका 2004 से 2014 तक का प्रधानमंत्री कार्यकाल आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढाँचा और प्रौद्योगिकी में निवेश द्वारा चिह्नित था।

सिंगापुर के ‘वर्ल्ड एशिया फोरम’ में भारत की उन्नत भूमिका, अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौते में सक्रिय भागीदारी और राष्ट्रीय विज्ञान नीति में सुधार उनके कार्यकाल के मुख्य पहलू थे। उन्होंने 2010 में ‘भारत-अमेरिका नागरिक वाणिज्य संधि’ को साकार किया, जिससे दो पक्षों के बीच व्यापार में 30% की वृद्धि हुई।

2024 में 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ, जिससे पूरे देश में शोक का माहौल था। कई प्रमुख नेताओं, कला और विज्ञान के चमकते सितारों ने उनकी स्मृति में तस्वीरें, लेख और शोक संदेश प्रकाशित किए। उनका निधन देश में एक खाली जगह छोड़ गया, लेकिन उनका विचारधारा और नीतियों का असर अभी भी जीवित है।

मोदी द्वारा इस श्रद्धांजलि को जनता ने सकारात्मक रूप से ग्रहण किया। कई डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लोगों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव और सिंह जी के काम से मिली प्रेरणा को साझा किया। यह दिखाता है कि वर्षों के बाद भी उनका योगदान सामाजिक और आर्थिक स्तर पर गहरा असर रखता है।

सिंगल पोस्ट में मोदी ने न केवल सिंह जी को व्यक्तिगत सम्मान दिया, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की परस्पर सम्मान की भावना को भी उजागर किया। यह उल्लेखनीय है कि दोनों नेताओं ने अपने-अपने समय में भारत को नई दिशा दी, और इस तरह के स्मरण कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में मददगार साबित होते हैं।

19 टिप्पणि

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    Abdul Kareem

    सितंबर 27, 2025 AT 17:32
    मनमोहन सिंह जी की शांति और गहराई आज भी कमाल है। उन्होंने जो नीतियाँ बनाईं, वो आज भी काम करती हैं। कोई नारा नहीं, कोई शोर नहीं, बस विचार और कार्य।
    कभी किसी ने उन्हें बड़ा नहीं कहा, लेकिन सबने उनकी बात मानी।
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    Namrata Kaur

    सितंबर 29, 2025 AT 10:09
    उनके समय में बिजली बार-बार जा रही थी, लेकिन अर्थव्यवस्था चल रही थी। आज के लोगों को याद रखना चाहिए।
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    indra maley

    अक्तूबर 1, 2025 AT 03:00
    कभी किसी ने उन्हें राजनीति का नायक बनाने की कोशिश नहीं की
    और फिर भी वो नायक बन गए
    क्योंकि उनका जीवन खुद एक उपन्यास था
    जिसमें शक्ति का अर्थ दिखाना था
    न कि दिखाना
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    Kiran M S

    अक्तूबर 2, 2025 AT 18:14
    देखो ये राजनीति का असली स्वरूप है। आजकल तो एक दूसरे के बारे में बुरा बोलना ही नेक बात हो गई है। मोदी जी ने ये दिखाया कि नेतृत्व का मतलब बड़ा बोलना नहीं, बल्कि सम्मान देना है।
    ये वो चीज है जो बाकी सब भूल गए।
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    Paresh Patel

    अक्तूबर 4, 2025 AT 05:02
    इस तरह के संकेत बहुत जरूरी हैं। हमारी आदत हो गई है कि दूसरे के गुणों को नज़रअंदाज़ कर दें।
    मनमोहन सिंह जी ने भारत को दुनिया के सामने खड़ा किया।
    और आज भी हम उनके निर्माण की छत के नीचे रह रहे हैं।
    शुक्रिया डॉ।
    हमें याद रखना चाहिए।
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    anushka kathuria

    अक्तूबर 5, 2025 AT 18:03
    यह पोस्ट एक उदाहरण है कि राष्ट्रीय नेतृत्व कैसा होना चाहिए। व्यक्तिगत राजनीतिक विरोध को अलग रखकर सार्वजनिक योगदान की सराहना करना।
    इस तरह के संकेतों की अत्यधिक आवश्यकता है।
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    Noushad M.P

    अक्तूबर 7, 2025 AT 02:16
    modi ji ne kya kaha wo toh theek hai lekin kya humare desh mein abhi bhi koi aisa leader hai jo 1991 ke reforms ko samajh pata hai?
    ya sab kuch sirf slogan ban gaya hai?
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    Sanjay Singhania

    अक्तूबर 8, 2025 AT 23:46
    The 1991 reforms weren't just economic-they were epistemological. Singh ji redefined the ontology of Indian governance: from rent-seeking to rational allocation.
    He didn't just open markets-he opened minds.
    And now? We've regressed into performative populism.
    That's the tragedy.
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    Raghunath Daphale

    अक्तूबर 10, 2025 AT 07:43
    अरे ये सब तो बस फोटो शेयर करने का मौका है।
    जब तक वो अपने बेटे को नौकरी नहीं देते, तब तक ये सब नाटक है। 😒
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    Renu Madasseri

    अक्तूबर 11, 2025 AT 00:58
    मैं बचपन में उनके भाषण सुनकर सोचती थी कि भारत का भविष्य अच्छा होगा।
    उनकी आवाज़ में विश्वास था।
    आज भी उस आवाज़ को याद करती हूँ।
    हमें ऐसे लोगों को बनाना होगा।
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    Aniket Jadhav

    अक्तूबर 11, 2025 AT 02:35
    कल एक बुजुर्ग आदमी बाजार में बोल रहा था कि आजकल के लोगों को नहीं पता कि बिना बिजली के भी देश चल सकता है।
    मैंने सोचा वो डॉ. सिंह जी के बारे में ही बोल रहा था।
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    Anoop Joseph

    अक्तूबर 12, 2025 AT 03:14
    अच्छा काम किया।
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    Kajal Mathur

    अक्तूबर 13, 2025 AT 23:13
    इस तरह की श्रद्धांजलि तो बहुत अच्छी है, लेकिन क्या यह केवल एक फोटोग्राफिक जनता के लिए एक फोटो शेयरिंग एक्ट है? क्या इसके बाद कोई नीति बन रही है? क्या हम उनकी विचारधारा को अपना रहे हैं, या केवल उनकी याद में एक ट्वीट?
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    rudraksh vashist

    अक्तूबर 15, 2025 AT 03:00
    मैंने उन्हें एक बार राजस्थान में देखा था।
    कोई नहीं जानता था कि वो कौन हैं।
    बस एक शांत आदमी, एक किताब के साथ।
    उस दिन से मैंने सोचा कि असली नेता वो होते हैं जो खुद को नहीं बताते।
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    Archana Dhyani

    अक्तूबर 15, 2025 AT 20:25
    आज के युवा जो लोग लोकतंत्र को नाटक कहते हैं, उन्हें याद दिलाना चाहिए कि एक आदमी जिसने देश को निर्माण किया, उसके बाद भी जब एक नेता उसके नाम को बोलता है, तो यह एक अनुभव है।
    यह एक नाटक नहीं, यह एक अर्थ है।
    यह एक विरासत है।
    यह एक आत्मा है।
    यह एक अपरिहार्य याद है।
    और आज का राजनीतिक वातावरण इस याद को भूल रहा है।
    हम उस आत्मा को नहीं बचा पा रहे हैं।
    हम उसकी बात को नहीं समझ पा रहे हैं।
    हम उसकी शांति को नहीं समझ पा रहे हैं।
    हम उसकी विचारधारा को नहीं समझ पा रहे हैं।
    हम उसकी नीति को नहीं समझ पा रहे हैं।
    हम उसके विरासत को नहीं समझ पा रहे हैं।
    और इसलिए हम खो रहे हैं।
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    Guru Singh

    अक्तूबर 17, 2025 AT 15:57
    1991 में जब आर्थिक सुधार हुए, तो मैं एक छात्र था। उस वक्त की चुनौतियाँ आज के लोगों को नहीं पता।
    मनमोहन सिंह ने जो किया, वो नहीं तो भारत अब भी निर्यात नहीं कर पाता।
    कोई नहीं बोलता, लेकिन ये तथ्य है।
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    Sahaj Meet

    अक्तूबर 17, 2025 AT 23:02
    मेरे दादा ने कहा था, असली नेता वो होते हैं जिनके बारे में लोग बात करते हैं, लेकिन उनके नाम का इस्तेमाल नहीं करते।
    डॉ. सिंह जी ऐसे थे।
    उनकी याद आज भी घरों में है, बस ट्विटर पर नहीं।
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    Madhav Garg

    अक्तूबर 19, 2025 AT 22:46
    मोदी जी का यह संदेश राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है।
    राजनीति में व्यक्तिगत भावनाएँ छोड़कर सार्वजनिक विरासत का सम्मान करना ही असली नेतृत्व है।
    यह एक ऐतिहासिक क्षण था।
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    Sumeer Sodhi

    अक्तूबर 21, 2025 AT 09:18
    ये सब बस चुनावी लाभ के लिए है।
    जब तक तुम्हारे दोस्तों को नौकरी नहीं मिल रही, तब तक ये सब फर्जी है।
    मनमोहन सिंह जी को तो मान लिया गया, लेकिन उनके बाद क्या हुआ? कोई नहीं बताता।

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