नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सिंह को 93वें जन्मदिन पर किया यादगार सलाम
मोदी द्वारा सामाजिक मंच पर श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितंबर 2025 को एक भावपूर्ण पोस्ट के माध्यम से मनमोहन सिंह को उनके 93वें जन्म दिवस पर याद किया। X (पहले ट्विटर) पर मोदी ने लिखा, "पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ। हम उनके सार्वजनिक जीवन के लम्बे वर्षों में भारत को दी गई उपलब्धियों को फिर से याद करते हैं।" यह संदेश राष्ट्रीय स्तर पर कई लोगों द्वारा सराहा गया, क्योंकि यह दिखाता है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी एक दूसरे के योगदान का सम्मान कर सकते हैं।
इस पोस्ट में मोदी ने सिंह जी के आर्थिक सुधारों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्रगति और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव को उजागर किया। उन्होंने कहा कि सिंह जी के नेतृत्व में भारत ने 1991 की आर्थिक उछाल से लेकर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ साझेदारी तक कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए।
डॉ. मनमोहन सिंह की विरासत की समीक्षा
डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को गुरदेववाड़ा, पाकिस्तान (अब भारत) में हुआ था। वे एक महान अर्थशास्त्री, शैक्षिक विद्वान और राजनेता थे। 1991 में उनका आर्थिक उदारीकरण योजना भारत को बाहरी निवेश और बाजार खुलापन की ओर ले गई, जिससे लाखों रोजगार और वृद्धि हुई। उनका 2004 से 2014 तक का प्रधानमंत्री कार्यकाल आर्थिक स्थिरता, बुनियादी ढाँचा और प्रौद्योगिकी में निवेश द्वारा चिह्नित था।
सिंगापुर के ‘वर्ल्ड एशिया फोरम’ में भारत की उन्नत भूमिका, अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौते में सक्रिय भागीदारी और राष्ट्रीय विज्ञान नीति में सुधार उनके कार्यकाल के मुख्य पहलू थे। उन्होंने 2010 में ‘भारत-अमेरिका नागरिक वाणिज्य संधि’ को साकार किया, जिससे दो पक्षों के बीच व्यापार में 30% की वृद्धि हुई।
2024 में 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ, जिससे पूरे देश में शोक का माहौल था। कई प्रमुख नेताओं, कला और विज्ञान के चमकते सितारों ने उनकी स्मृति में तस्वीरें, लेख और शोक संदेश प्रकाशित किए। उनका निधन देश में एक खाली जगह छोड़ गया, लेकिन उनका विचारधारा और नीतियों का असर अभी भी जीवित है।
मोदी द्वारा इस श्रद्धांजलि को जनता ने सकारात्मक रूप से ग्रहण किया। कई डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लोगों ने अपने व्यक्तिगत अनुभव और सिंह जी के काम से मिली प्रेरणा को साझा किया। यह दिखाता है कि वर्षों के बाद भी उनका योगदान सामाजिक और आर्थिक स्तर पर गहरा असर रखता है।
सिंगल पोस्ट में मोदी ने न केवल सिंह जी को व्यक्तिगत सम्मान दिया, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की परस्पर सम्मान की भावना को भी उजागर किया। यह उल्लेखनीय है कि दोनों नेताओं ने अपने-अपने समय में भारत को नई दिशा दी, और इस तरह के स्मरण कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में मददगार साबित होते हैं।
Abdul Kareem
सितंबर 27, 2025 AT 17:32कभी किसी ने उन्हें बड़ा नहीं कहा, लेकिन सबने उनकी बात मानी।
Namrata Kaur
सितंबर 29, 2025 AT 10:09indra maley
अक्तूबर 1, 2025 AT 03:00और फिर भी वो नायक बन गए
क्योंकि उनका जीवन खुद एक उपन्यास था
जिसमें शक्ति का अर्थ दिखाना था
न कि दिखाना
Kiran M S
अक्तूबर 2, 2025 AT 18:14ये वो चीज है जो बाकी सब भूल गए।
Paresh Patel
अक्तूबर 4, 2025 AT 05:02मनमोहन सिंह जी ने भारत को दुनिया के सामने खड़ा किया।
और आज भी हम उनके निर्माण की छत के नीचे रह रहे हैं।
शुक्रिया डॉ।
हमें याद रखना चाहिए।
anushka kathuria
अक्तूबर 5, 2025 AT 18:03इस तरह के संकेतों की अत्यधिक आवश्यकता है।
Noushad M.P
अक्तूबर 7, 2025 AT 02:16ya sab kuch sirf slogan ban gaya hai?
Sanjay Singhania
अक्तूबर 8, 2025 AT 23:46He didn't just open markets-he opened minds.
And now? We've regressed into performative populism.
That's the tragedy.
Raghunath Daphale
अक्तूबर 10, 2025 AT 07:43जब तक वो अपने बेटे को नौकरी नहीं देते, तब तक ये सब नाटक है। 😒
Renu Madasseri
अक्तूबर 11, 2025 AT 00:58उनकी आवाज़ में विश्वास था।
आज भी उस आवाज़ को याद करती हूँ।
हमें ऐसे लोगों को बनाना होगा।
Aniket Jadhav
अक्तूबर 11, 2025 AT 02:35मैंने सोचा वो डॉ. सिंह जी के बारे में ही बोल रहा था।
Anoop Joseph
अक्तूबर 12, 2025 AT 03:14Kajal Mathur
अक्तूबर 13, 2025 AT 23:13rudraksh vashist
अक्तूबर 15, 2025 AT 03:00कोई नहीं जानता था कि वो कौन हैं।
बस एक शांत आदमी, एक किताब के साथ।
उस दिन से मैंने सोचा कि असली नेता वो होते हैं जो खुद को नहीं बताते।
Archana Dhyani
अक्तूबर 15, 2025 AT 20:25यह एक नाटक नहीं, यह एक अर्थ है।
यह एक विरासत है।
यह एक आत्मा है।
यह एक अपरिहार्य याद है।
और आज का राजनीतिक वातावरण इस याद को भूल रहा है।
हम उस आत्मा को नहीं बचा पा रहे हैं।
हम उसकी बात को नहीं समझ पा रहे हैं।
हम उसकी शांति को नहीं समझ पा रहे हैं।
हम उसकी विचारधारा को नहीं समझ पा रहे हैं।
हम उसकी नीति को नहीं समझ पा रहे हैं।
हम उसके विरासत को नहीं समझ पा रहे हैं।
और इसलिए हम खो रहे हैं।
Guru Singh
अक्तूबर 17, 2025 AT 15:57मनमोहन सिंह ने जो किया, वो नहीं तो भारत अब भी निर्यात नहीं कर पाता।
कोई नहीं बोलता, लेकिन ये तथ्य है।
Sahaj Meet
अक्तूबर 17, 2025 AT 23:02डॉ. सिंह जी ऐसे थे।
उनकी याद आज भी घरों में है, बस ट्विटर पर नहीं।
Madhav Garg
अक्तूबर 19, 2025 AT 22:46राजनीति में व्यक्तिगत भावनाएँ छोड़कर सार्वजनिक विरासत का सम्मान करना ही असली नेतृत्व है।
यह एक ऐतिहासिक क्षण था।
Sumeer Sodhi
अक्तूबर 21, 2025 AT 09:18जब तक तुम्हारे दोस्तों को नौकरी नहीं मिल रही, तब तक ये सब फर्जी है।
मनमोहन सिंह जी को तो मान लिया गया, लेकिन उनके बाद क्या हुआ? कोई नहीं बताता।